स्वास्थ्य के प्रकार
स्वास्थ्य के कई प्रकार हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा
अनुमोदित प्रकारों में स्वास्थ्य के तीन प्रमुख प्रकार हैं-
शारीरिक अथवा भौतिक, मानसिक तथा सामाजिक कई
अन्य प्रकारों में आध्यात्मिक, भावनात्मक आदि पहलुओं
को भी सम्मिलित किया गया है। यहाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन
द्वारा अनुमोदित स्वास्थ्य के तीन प्रकारों का वर्णन किया जा
रहा है-
1. शारीरिक या भौतिक स्वास्थ्य (Physical Health)
शारीरिक या भौतिक स्वास्थ्य को समझना प्रायः सबसे आसान है।
इसका अर्थ है-“शरीर के सभी अंग (organs) तथा तन्तु (cells) शरीर
में परस्पर पूर्ण सामंजस्य रखते हुए अपनी अपेक्षित क्षमता के अनुरूप
कार्य कर रहे हैं। इसकी पहचान साफ-सुथरी त्वचा, कान्तिमय बाल,
चमकदार आँखें पर्याप्त भूख लगना, सन्तुलित सुगठित शरीर, मलाशय
एवं मूत्राशय का नियमित रूप से कार्य करना तथा ज्ञानेन्द्रियों द्वारा
शरीर के सही क्रियान्वयन से होती है।”
2. मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health)
मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ है- “मनुष्य का बाहरी दुनिया से सही तालमेल
अर्थात् वह परिस्थिति जिसमें मनुष्य स्वयं के और अपने आस-पास के
लोगों तथा वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित रख सकता है। “
3. सामाजिक स्वास्थ्य (Social Health)
समाज में स्वयं को प्रतिस्थापित करना, समाज को अपने परिवार के
विस्तृत रूप में पहचानना तथा आनन्ददायी जीवन-यापन के लिए ऐसा
माहौल तैयार करना जिसमें सभी प्रेमपूर्वक तथा सही तालमेल के साथ
रह सकें, एक स्वस्थ समाज के निर्माण के चरण हैं। सामाजिक स्वास्थ्य में
मनुष्य अपने तथा अपने परिवार के सुख-साधनों को जुटाकर
शान्तिपूर्वक
वातावरण में रहता है तथा अन्य के लिए भी ऐसे ही वातावरण की अपेक्षा
करता है।
इन तीन प्रमुख प्रकारों के अतिरिक्त कुछ और पहलू इस दिशा में
शामिल किये गये हैं, जैसे-
1. भावनात्मक पहलू (Emotional Dimension) – इस पहलू को
मानसिक स्वास्थ्य के साथ समाहित किया जाता था, लेकिन समय के साथ
इनमें अन्तर अनुभव किया गया है। जहाँ मस्तिष्क का सम्बन्ध सत्यता को
जानने-समझने से है, भावनाओं का सम्बन्ध दिल के भावों (Feelings) से है।
2. आध्यात्मिक पहलू (Spiritual Dimension) – यह माना जाता है
कि आध्यात्म मानसिक शान्ति देता है तथा मानसिक शान्ति मानसिक
स्वास्थ्य के अतिरिक्त अन्य कई शारीरिक कष्टों से भी मुक्ति दिलाने में
सक्षम है।
सम्पूर्ण अथवा वास्तविक स्वास्थ्य
(Perfect or Positive Health) –
इन सब जानकारियों को समाहित कर सम्पूर्ण स्वास्थ्य को अग्र शब्दों में
परिभाषित किया जा सकता है “सम्पूर्ण स्वास्थ्य मनुष्य की वह अवस्था
है,
जिसमें उसके शरीर का प्रत्येक अंग एवं तन्तु सही कार्य कर रहा हो;
उसका
मस्तिष्क सोचने-समझने तथा समायोचित निर्णय लेने की क्षमता रखता
हो
तथा बाहरी समाज से उसका सही तालमेल तथा सामंजस्य बना हुआ
हो।”
वैज्ञानिकों का मानना है कि आज के वातावरण में सम्पूर्ण स्वास्थ्य एक
मिथ्या
है, जिसे पाना मनुष्य के लिए नामुमकिन, है। आज हर मनुष्य किसी न
किसी
रूप में चिन्ता, हार-जीत, थकान से घिरा हुआ है अर्थात् वास्तविक स्वस्थ
व्यक्ति वही है, जो परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढाल सकने की
क्षमता
रखता है, तथा हर परिस्थिति में अपना व्यक्तित्व कायम रखता है।
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